अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अखबारी विज्ञापन बोले
 
अखबारी विज्ञापन बोले
नया साल आया

स्वागत की ऐसी तैयारी
क्लबों होटलों में
नई पौध का उमड़ा सारा
जोश बोतलों में

फर्राटा भरती सड़कों पर
नशा नया छाया

सिर्फ औपचारिकता ही अब
बाकी बची यहाँ
नया वर्ष शुभ हो कहने का
वह आनंद कहाँ

नए वर्ष की नई सुबह पर
मन ने समझाया

रमुआ कल भी भूखा सोया
भूखा ही जागा
उठकर सुबह पेट की खातिर
रिक्शा ले भागा

आज और कल में उसने कुछ
फर्क नहीं पाया

- योगेन्द्र वर्मा व्योम
२९ दिसंबर २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter