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जो बीत गया सो बीत गया
अब नए साल में
नए आशियाने का ख्व़ाब सजाया है।
जो काम हो न पाया अब तक
उम्मीद है अब वो हो जाए
अनजाने थे जो पथ अब तक
अब उन पर भी हम चल पाएँ
जो बीत गया सो बीत गया
अब नए साल में
नए संग का मृदु अहसास जगाया है।
नई फिज़ाओं में मिलता
है फूलों का पैगाम मुझे
पतझड़ तो आकर चली गई
लानी है नई बहार मुझे
जो बीत गया सो बीत गया
अब नए साल में
आशा का मैंने नवल प्रदीप जलाया है।
अमन गर्ग
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