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नव वर्ष अभिनंदन

नए साल में

         

जो बीत गया सो बीत गया
अब नए साल में
नए आशियाने का ख्व़ाब सजाया है।

जो काम हो न पाया अब तक
उम्मीद है अब वो हो जाए
अनजाने थे जो पथ अब तक
अब उन पर भी हम चल पाएँ

जो बीत गया सो बीत गया
अब नए साल में
नए संग का मृदु अहसास जगाया है।

नई फिज़ाओं में मिलता
है फूलों का पैगाम मुझे
पतझड़ तो आकर चली गई
लानी है नई बहार मुझे

जो बीत गया सो बीत गया
अब नए साल में
आशा का मैंने नवल प्रदीप जलाया है।

अमन गर्ग

  

आ रहे हो न

आओ नव वर्ष
तुम्हारा स्वागत है
हम तो रह गए हैं
खुद में ही उलझ कर
चक्रव्यूह ही चक्रव्यूह
हैं सब तरफ़
सबकी नज़र है तुम्हारी तरफ़
हे नव वर्ष
मत लाना तुम
पिछले झगड़े दंगे
दिल घबराता है इन
मारक चीज़ों से
तुम साथ लाना सिर्फ़ प्रेम
यही कहीं दिखता नहीं।
मानव रीता हो गया है।
तुम बिखराओगे न
प्रेम अपनेपन के फूल।
तुम लाओगे न ये सौगात
बोलो
प्रेम की अलख जगाओगे ना
विश्वास कर रही हूँ
निराश नहीं करोगे।
हे नव वर्ष आओ
अंजुरि भर प्रेम से
जगत का
दामन भर दो।

मधुलता अरोरा

 

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