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नव वर्ष अभिनंदन

छोटी कविताएँ

अभिनव नववर्ष हो

शांति मंत्र जाप-सा
शक्ति के प्रस्ताव-सा
वर्ष नव दीप-सा
प्रेम जन्य सीप-सा
पुण्य आगमन करे
ज्ञान को नमन करे
ग्राम पुर सजा रहे
प्रेम की ध्वजा रहे
कष्ट क्लेश दूर हों
व्यर्थ दंभ चूर हों
प्रीत प्रगति हर्ष हो
'अभिनव' नव वर्ष हो।

अभिनव शुक्ला

नव वर्ष का स्वागत करें

आओ मिलकर हम सभी
नव वर्ष का स्वागत करें
नव वर्ष का स्वागत करें
संकल्प नव धारण करें
नव वर्ष की नव चेतना से
शक्ति नव अर्जित करें
भारत के नवनिर्माण का
जिससे कि प्रण पूरा करें
ज्ञान और विज्ञान को
इस देश में विकसित करें
अंधश्रद्धा को मिटा कर
देश को साक्षर करें

सत्यनारायण सिंह

गीत नया

देखते ही देखते एक वर्ष बीत गया
हम तो हार गए और वक्त जीत गया
मिलेगा इस साल अगर कोई मीत नया
मिल कर लिखेंगे कोई गीत नया

अनूप अग्रवाल

और एक साल

कुछ मिला भी कुछ खो भी गया
चाहतें पर न हुईं कम

और एक साल पीछे रह गया
और एक साल आगे बढ़ गए हम

इस जीवनचक्र की दौड़ में
न रुके कभी न लिया है दम

जो टूट गया वो भ्रम ही था
जो छूट गया उसका क्या ग़म

आ नए क्षितिज की ओर चलें
और छू लें जा के नया गगन

नीना मुखर्

नया साल आया रे

नया साल आया रे
खुशियों का तोहफ़ा लाया रे

नए साल की नई किरण
संकल्पों की नई कहानी
सुबह सुहानी
और हवा में नई रवानी

नई ताजगी नई उमंगें
नए स्वप्न की नई तरंगें
नई दूब पर
नई ओस के पग सतरंगे

नई धूप की खिलती बदली
नई कली पर नई ही तितली
नए विश्व में
आशाओं की किरणें उजली

चिड़ियों का गाना भाया रे
नया साल आया रे

अरुणा घवाना

नव वर्ष

समय के
अथाह सागर का सीना चीर
मचलती इठलाती
हँसती-हँसाती उमड़ी है
नव वर्ष की
यह जो नई लहर।
शीघ्र ही
परंपरा अनुगामी हो
समस्त अग्रगामी कदमों को
अपने छल बल से
पीछे धकेल
अपनी पहचान की
अमिट छाप छोड़
इतिहास के कुएँ में
जा धँसेगी।

डॉ. शकुंतला तलवार
 

नव वर्ष दे

साहस सुयश सद्ज्ञान दे सत्कार दे
स्वाभिमानी नम्रता दे
सत्य का आधार दे
दे विमल मेधा प्रखर
नवकल्पना साकार दे
साहसों को दे विनय
विश्वास को संचार दे

राजेंद्र चौधरी

  

शुभ यह नव वर्ष हो

विजित हर संघर्ष हो
दिल में उमंग मन में हर्ष हो
सबका उत्कर्ष हो
शुभ यह नव वर्ष हो

नव वर्ष अभिनंदन

नव वर्ष अभिनंदन
स्वस्थ रहे तन
पुलकित हो मन
छूटें सब रूढ़ियों के बंधन
खिलें फूल घर आँगन
महकता रहे वर्ष भर जीवन

गोपाल मित्तल

शुभकामना

तेरी ऊँचाई इस नीले अंबर की हो
और गहराई तेरी समंदर की हो
आग भी चाहिए कुछ मशालें लिए
आग लेकिन वो तेरे ही अंदर की हो

बागेश्री चक्रधर

नव वर्ष नव सृजन

नव वर्ष नव सृजन
नवीन कामनाएँ नवीन आशाएँ
नित नई अभिलाषाएँ
खुशी के नव रंग
उल्लसित मन हर्षित तन
रचित हों नई दिशाएँ
कामनाओं के उच्च शिखर पर
परिपूर्ण हो मनोकामनाएँ

ऋषि दीक्षित

नव वर्ष

समय थमता नहीं
उधेड़ रहा
परत दर परत
वर्षों को आशा में कि
शायद
निकल आए
श्रमफल कर्मफल
इसबार
इस परत के नीचे।
चल रहा सदियों से
यही चक्र अजीब
बना जीवन की नींव।।

श्याम प्रकाश झा
 

नया वर्ष
नया वर्ष
नई उम्मीदों
नई तैयारियों
नई शुरुआतों के नाम
पराजय की घड़ी में भी
विजय के सपनों के नाम
जीवन संघर्ष और सृजन के नाम

अनुराग सिंह

दोहा
कालचक्र की डोर पर नए साल के छंद
जीवन के आकाश में उड़ा रहे मकरंद

पूर्णिमा वर्मन

 

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