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नव वर्ष अभिनंदन

नए वर्ष पर

         

नए वर्ष की पहली रात में
तुमने अपनी डायरी में
मेरे लिए शुभकामनाएँ लिखीं :
कि मुझे दुनिया में वह सब मिले
जो अभीष्ट और काम्य है
सब तरह का सुख
लंबी उम्र
देश-विदेश में नाम और ख्याति
यानि
विस्तृत विशाल सर्जन कर्म।
मैं तुम्हारी शुभकामनाओं के लिए
हृदय से कृतज्ञ हूँ
लेकिन मेरे दूरवासी दोस्त तुम एक चीज़ की कामना करना भूल गए
कि मैं

तुम्हारे अंतरंग नैकट्य की
अर्थपूर्ण अनुभूति में
उस सबका साक्षात्कार करूँ
जो
ज़िंदगी की शून्यता को भरने
उसकी निरर्थकता को काटने
और उसके अग्रगामी रास्तों को
अलोकित करने में
सक्षम है
यानि
मनुष्य और मनुष्य का
वह संबंध और साक्षात्कार
जो

रसपूर्ण ममत्व और आह्लाद का
स्वच्छ शुचि उद्गम है।

देवराज

  

नए वर्ष में नई पहले हो

नए वर्ष में नई पहल हो।
कठिन ज़िंदगी और सरल हो।।

अनसुलझी जो रही पहेली।
अब शायद उसका भी हल हो।।

जो चलता है वक्त देखकर।
आगे जाकर वही सफल हो।।

नए वर्ष का उगता सूरज।
सबके लिए सुनहरा पल हो।।

समय हमारा साथ सदा दे।
कुछ ऐसी आगे हलचल हो।।

सुख के चौक पुरें हर द्वारे।
सुखमय आँगन का हर पल हो।।

सजीवन मयंक
1 जनवरी 2008

फिर आया है नया साल

सर्द रातों की एक हवा जागी
और बर्फ़ की चादर ओढ़
सुबह के दरवाज़े पर दस्तक दी उसने
उनींदी आँखों से सुबह की अंगड़ाई में भीगी ज़मीन से ज्यों फूटा
एक नया कोपल
नए जीवन और नई उमंग
नई खुशियों के संग
दफ़ना कर कई काली रातों को
झिलमिलाते किरनों में भीगता
नई आशाओं की छाँव में
नए सपनों का संसार बसाने
बर्फ़ीली रात की अंगड़ाई के साथ
बसंत के आने की उम्मीद लिए
आज सब पीछे छोड़
चला वो अपनाने नए आकाश को
नए सुबह की नई धूप में
नई आशाओं की नई किरन के संग
आज फिर आया है नया साल
पीछे छोड़ जाने को परछाइयाँ

मानोशी चैटर्जी

 

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