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नव वर्ष अभिनंदन

वर्ष दो हज़ार चार

         

साल नया वर्ष दो हज़ार चार।
लेकर आया अनुपम उपहार।

नई उमंगे नई तरंगे।
नई दिशाएँ नई हवाएँ।
नई परीक्षाएँ नई आशाएँ।
नया-नया लगता संसार
नवजीवन का हुआ संचार।
साल नया वर्ष दो हज़ार चार।

प्रगति पथ पर बढ़े संसार।
उन्नति करे कारोबार।
दुआ करूँ मैं बारमबार।
ख़त्म हो जग में भ्रष्टाचार।
बढ़े सब में प्यार दुलार।
साल नया वर्ष दो हज़ार चार।

गौरव ग्रोवर

  

दादी कहती है

दादी कहती है कि
जब जब नया साल आता है
महँगाई की फुटबॉल में
दो पंप हवा और डाल जाता है
गरीबी की चादर में
एक पैबंद और लगाकर
भ्रष्टाचार का प्रमोशन कर जाता है
ईमानदारी कहीं बदचलन न हो जाए
इसलिए
बेईमानी का पहरा बैठा जाता है
मटर के खेतों की रखवाली
बकरों को सौंप जाता है।
दादी यह सब देखकर
जाने क्यों चिढ़ती है
शायद सठिया गई हैं
अरे ठीक ही तो है

नया साल आएगा
खुशियाँ लाएगा
महँगाई की फुटबॉल को
थोड़ा और फुला जाएगा
सच खेलने में बड़ा मज़ा आएगा।
खेलने में बड़ा मज़ा आएगा।।

डॉ. जगदीश व्योम

 

 

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