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        यह पतंग जीवन की

 
सुंदर तन पर विविध रंग ले उड़ी जा रही
यह पतंग जीवन की

श्वेत-श्याम सच और झूठ हैं
सुर्खलाल अनुरागी
केसरिया रंग जीत इंद्रियाँ
बना रहा है त्यागी
धानी-हरा बिखेरे खुशियाँ
शांत भाव उपजाए
मन में नव उल्लास
जगाकर पीत वर्ण शगुनाए

नभ में सतरंगी पंखों
से उड़ी जा रही
यह पतंग जीवन की

बँधी विधाता हाथों
उर्मिल डोरी है साँसो की
दशा-दिशा नित बदल
पुष्टि करती है विश्वासों की
उतना ही आकाश छू सकी जितनी लंबी साँसें
तन-मन-प्राण संभाले डोरी केवल ईश कृपा से

सुख-दुख को प्रारब्ध
मान ये उड़ी जा रही
यह पतंग जीवन की

- डॉ मंजु लता श्रीवास्तव
१ फरवरी २०२१

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