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            लगती सुहानी रात

 
जाती शरद जब अपने घर को
आती है शीत सुहानी
सूरज भी उठता है सोकर
सर्दी में कुछ देर से।

खान पान का वैभव
लेकर आती सर्दी अपने संग
गाजरगन्ना औऱ गुड़ भेली
भरती जीवन में मीठे रंग।

हूँ हूँ करती रहती सुबह
दुपहर में मिलती राहत
बीत जाता है जल्दी दिन
ठहरी रहती रात।

सवेटर शाल दुशाले मफलर
रहते दिनभर साथ
रजाईगद्दे कंबल संग
लगती सुहानी रात।

क्रोध से तपता सूरज भी
हो जाता शीतल शांत
मानों घर जंवाई कोई
कहता हो अपनी बात.।

- उर्मिला शुक्ल
१ दिसंबर २०२४

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