अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

दीपावली

   



 

चिर प्रतीक्षा के बाद
मिली ख़ुशी
दे जाती है अपार सुख
और मन जाता है त्योहार!
एक अरसे बाद...
आज उसने भी
त्योहार मनाया
हफ़्तों से बेसुध पड़े शिशु ने
जब आँखें खोल पानी माँगा
उम्मीदें प्रज्वलित हो उठीं
आँसुओं की झालरें बंदनवार सी
टँग गयीं
दीपमालाएँ झिलमिलाईं
कुटिया रौशनी से खूब नहाई
दुनिया की सारी दौलत उसके
आँचल में समाई
बरसों बाद...
आज उसने भी दीपावली मनाई

- सरस दरबारी
१ नवंबर २०१५

   

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter