अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

मंगल गान करें

   



 

मंगल गान करें

हर दीपक में जोत शुभंकर
किरण किरण में जीवन निर्झर
मिल जुल आज भरें

स्वस्ति ऋचाओं की रंगोली
हल्दी चन्दन अक्षत रोली
घर घर चलो धरें

धरती से उस दूर गगन तक
सुमन सुमन फूलें निष्कंटक
बन सुवास बिखरें

सत्यम शिवम् सुन्दरम के स्वर
विमल बुद्धि निर्भय अभ्यंतर
जन जन में निखरें

रिद्धि सिद्धि अनुराग छंद बन
सुख सुभाग के राग चिरंतन
झर झर नित्य झरें

- सीमा अग्रवाल
१ नवंबर २०१५

   

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter