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         कंदीलें जलाकर कुछ न होगा

बे-वज़ह रावण जलाया जा रहा है
फर्ज़ था तो बस निभाया जा रहा है

देखिए कदमों में हम उसके है लेकिन
रोष उस पर ही दिखाया जा रहा है

दीप का लेकर बहाना आजकल तो
सच मे अंधेरा छुपाया जा रहा है

लाख कंदीलें जला के कुछ न होगा
जश्न जब झूठा मनाया जा रहा है

ले के रावण का बहाना ही युगों से
मन के रावण को बचाया जा रहा है

बस 'उमेश' अब नाम के त्योहार ही है
शव पे मेकअप ही लगाया जा रहा है

- उमेश मौर्य
१ नवंबर २०२१

     

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