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         कंदील दीप दो बंधु

कंदील दीप दो बंधु हैं
जीवन अलग-अलग

रहता एक महल के भीतर
दूजा खुले गगन की छाँव
इक गर्वीला, और सुरक्षित
दूजा भटके गाँव-गिराँव

कंदील दीप दो बंधु हैं
रस्ते अलग अलग

रंगमहल में स्वप्नों में इक
दूजा कठिन हवाओं में
राजमहल की शोभा में इक
दूजा फिरे घटाओं में

कंदील दीप दो बंधु हैं
जीवट अलग अलग

- मधु संधु
१ नवंबर २०२१

     

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