अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

     

         संस्कृति की कंदील

संस्कृति की कंदील जले
हर वंचित के घर में
सब सुविधाएँ सबके घर हों
स्वास्थ्य पले तन में

रहे रौशनी सबके घर में
चूल्हा रोज जले
दुख की मावस बीत जाएगी
सुख का राज चले

रीति-रिवाजों से हम जुड़ के
प्रेम भरे उन्मन में

करें उजाला दीवाली का
खुशियाँ भर लाएँ
हो लक्ष्मी का पूजन मिलकर
कुंठा दूर भगाएँ

आशाओं की रचा रँगोली
रंग भरें दामन में

- डॉ मंजु गुप्ता
१ नवंबर २०२१

     

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter