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         चौखट पर कंदील

जब से टाँगी उजियारे ने
चौखट पर कंदील
आँगन में उत्सव छाया, दुख
खुशियों में तब्दील

आज रोशनी ने धोई है
रातें मावस की
ज्योति रश्मियाँ बिखर रही ज्यों-
बातें पावस की
चाँद सितारे लगते जैसे
धरती पर गतिशील

आज साँझ ने दीप जलाए
ले आँचल की छाँव
जगमग-जगमग आई दिवाली
शहर गली हर गाँव
गूँज उठी कान्हा की वंशी
सुर लय बहें सलील

उत्सव में सब नाच रहे हैं
झूमें गायें गीत
गले मिल रहे सब आपस में
बनकर के ज्यों मीत
आतिशबाजी लक्ष्मी पूजा
चखे बताशे खील

- सुरेन्द्र कुमार शर्मा
१ नवंबर २०२१

     

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