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         भावना की कंदील में

१
आयेगी बनकर कंदील
मिट जायेगा आँखों में छाया अँधेरा
निशा घनेरी
बीत जाने की प्रतीक्षा में
सवेरा!

२

एक कंदील की आस में
बीत गये दिन...महीने...साल...
मैं जानता हूँ- मिटेगी तमस की सत्ता
शेष है कुछ समय और
मैं करूँगा प्रतीक्षा!

३
आस्था के चरखे पर
मैंने काते विश्वास के सूत
भावना की कंदील में
देखा तो-
सपनों ने बुन लिया था-
आकाश!

४
घने जंगलों के साये में
पास दिखी एक कंदील
हरे-भरे हो गये मुरझाये स्वप्न
जाग गया सूरज
बीत गयीं घनेरी रातें
जितने मुँह
उतनी बातें!

५
लाल-हरी चूड़ियों की खनक
कानों में गूँजी
आँखों के सामने घूम गयी
यादों की 'रील'
मन रौशन
ज्यों कंदील!

- डॉ. शैलेश गुप्त 'वीर'
१ नवंबर २०२१

     

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