अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

   

         ज्योति दीप की


ज्योति दीप की देख धरा का अंधकार भागा
दीप्त हुआ कण-कण वसुंधरा का
सु-भाग्य जागा

रेख दीप की
मुस्कानों के बीज धरा पर बोती
राह गली हर चौबारे पर आशा दीप सँजोती
रात अमावस हौले-हौले जीवन राग सुनाती
ओढ़ चुनरिया तारों वाली प्राण सुधा बरसाती
मुस्काया दीपों के सँग-सँग नेह-प्रेम का धागा
ज्योति दीप की देख धरा का
अंधकार भागा

मग्न नृत्य में
हुआ रात भर दीप शिखा उजियारा
लगा ऊँघने घर - मुँडेर पर काला-सा अँधियारा
त्यक्त अशक्त अभिशप्त सा मैं तू है उड़नखटोला
दग्ध हृदय कंपित काया लेकर अँधियारा बोला
टिका न दीप कतार के सम्मुख तिमिर अभागा
ज्योति दीप की देख धरा का
अंधकार भागा

- संगीता चौबे पंखुड़ी 

१ नवंबर २०२३
   

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है