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        दीप सबके


दीप मेरे
दीप सबके
दिखा सबको किरण का पथ

भेद का हर भाव भागे
सम दरस का चाव जागे
राग कर्मक हो अनागत
दिखा सबको किरण का पथ

रोशनी जब पास आये
अन्धकारी तिलमिलाये
विजय श्री की हो सदाक़त
दिखा सबको किरण का पथ

स्वार्थ का तम दुम दबाये
अन्त्य सँग-सँग जगमगाये
सत्य हाँके शिवम् का रथ
दिखा सबको किरण का पथ

दीप मेरे
दीप सबके

-- सुभाष वसिष्ठ

१ नवंबर २०२३
   

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