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        दीप जलाते रहना
 
अंधियारे से मत घबराना
सुंदर दीप जलाते रहना

माटी का है दीप हमारा,
माटी से नाता है
थोड़े तेल और बाती से
उजियारा आता है

खुद जलकर जो राह दिखाए
उसका मान बढ़ाते रहना

केवल घर नहीं, हृदय में
प्रेम-प्रीत के दीप जलें
भूखे होंठों पर मुस्कानें
सूने नयनों स्वप्न पलें

मानवता की इस चौखट पर
मंगल गान सुनाते रहना

- निरुपमा सिंह
१ नवंबर २०२६

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