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        घर-घर दीप जले
 
पाँव पसारे
घूम रहा तम अँधियारे में जग
दीप जलाओ सबके आँगन कर जगमग जगमग
बुझा न पाये मौसम चाहे
जितनी चाल चले

मंगलमय यह
शुभ पावन दिन वन्दनवार सजे
छलक रहा उल्लास चतुर्दिक मनमालिन्य तजे
दीप जलाएँ आओ मिलकर
सबसे मिलें गले

दसों-दिशाएँ
करें विमोचन इस दीप-पर्व का
मूलमंत्र है सत्य सनातन कल्याण सर्व का
शांति-मन्त्र का हो उच्चारण
विपदा हाथ मले

- श्रीधर आचार्य 'शील'
१ नवंबर २०२६

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