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        जगमग दीप जले
 
ज्ञान का सूरज
ज्योति--पथ पर
ले, विश्वास चले
जगमग दीप जले

मन उमंग--मयी
तन हो निरोगी
जीवन--ताप ढले
जगमग दीप जले

धन दे : लक्ष्मी
ज्ञान : गणेश दे
दे विवेक : शारदे
जगमग दीप जले

तम की चादर
चीर के ‘अनुपम’
स्वप्न नया संवरे
जगमग दीप जले

-अनुपम त्रिपाठी
१ नवंबर २०२६

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