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        प्रेम का दीपक
 
प्रेम दीपक हर हृदय में अनवरत जलता रहे
हर दीवाली पर मधुर उपहार यह मिलता रहे

प्रेम का दीपक हृदय में अनवरत जलता रहे
हर दिवाली पर मधुर उपहार
ये मिलता रहे

आपका है साथ हमको क्या करेंगी दूरियां
ढाल बनकर यूँ खड़े प्रभु चल रही जब छूरियां
आ जलाएं दीप मिलकर
जो सदा जलता रहे

हम अगर मिल भी न पाए याद तो आती सदा
भूलती हमको नही है आपकी कोई अदा
प्रीत का व्यवहार मधुरिम
अनवरत चलता रहे

बैठ कर हम संग पूजे माँ भवानी को सदा,
वो करें हम पे कृपा फिर राज रानी हो सदा
प्रीत का ये प्रसून नित प्रति
और भी खिलता रहे

हम चले हैं जिस तरफ अब संग ले परिवार को
हार मानी है नही प्रिय मानते बस प्यार को
हो सफर में हम सफर बस
नेह हृद पलता रहे

- उपमा आर्य
१ नवंबर २०२६

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