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तुम्हें नमन
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को समर्पित कविताओं का संकलन

 

बापू

ऐसा भी कोई जीवन का मैदान कहीं
जिसने पाया कुछ बापू से वरदान नहीं
मानव के हित जो कुछ भी रखता था माने
बापू ने सबको गिन-गिनकर-
अवगाह लिया।

बापू की छाती की हर साँस तपस्या थी
आती जाती हल करती एक समस्या थी
पल बिना दिए कुछ भेद कहाँ पाया जाने
बापू ने जीवन के क्षण-क्षण को-
थाह लिया।

किसके मरने पर जग भर को पछताव हुआ
किसके मरने पर इतना हृदय-मथाव हुआ
किसके मरने का इतना अधिक प्रभाव हुआ
बनियापन अपना सिद्ध किया सोलह आने
जीने की कीमत कर वसूल पाई-पाई
मरने का भी बापू ने मूल्य-
उगाह लिया।

-अज्ञात

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