अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर


         सावन

 
 
कच्ची छतों की खपरैलों से बह कर
घरों के आँगन में उतर जाता है
गाँव का सावन

दौड़ा ले जाता है अपने साथ
पीहर लौटीं सखियों सहेलियों को
खलिहान की बड़ी नीम पर
बँधे लंबी रस्सियों के झूलों पर
और देर तक सुनता है
उनकी पींगों के साथ चढ़ते उतरते
मल्हार और कजरी के सुर

फिर पेड़ के पत्तों से टकराती बूँदों के स्वरों को
उनकी चुहुल भरी हँसी में मिला कर
धीरे से घास में उतर कर
समा जाता है खेतो की मिट्टी में

शहरों का सावन सजता है
काली काली डामर की सड़कों के इर्द गिर्द लगी
रंग बिरंगी छतरियों राखियों
और बाँधनी की चुनरियों की दुकानों में

सड़क किनारे खड़े भुट्टे वालों के ठेलों के
तसलों में पड़े कोयले और लकड़ियों के टुकड़ों को
सीला कर देता है और हँसता है जोर से
उस नकचढ़ी बुढ़िया की गालियाँ सुनकर
जिसे ये भी नहीं पता कि वही तो खींच लाता है
चटपटे गुनगुने स्वाद की तलाश में
अधभीगे ग्राहकों को उसके ठेले तक

गाड़ियों की हेड लाइट में झिलमिलाता है
और उनके विंड स्क्रीन पर
अपनी बूँदों की लकीरें बनाता है
पक्की छतों के पाइपों से निकल कर
बहता है सड़को और फुटपाथों पर
और फिर भर जाता है
दिन भर काम की तलाश में थक कर आये
दिहाड़ी मज़दूरों की झुग्गियों में

पर इन सब से अलग है मेरा सावन
जो मेरे कमरे की खिड़की में उमड़ता है
वो हवा में झूमते हुए बड़े बड़े पेड़ों से उलझते
और लिपटते बादलों से फिसल कर
बगिया के खूबसूरत फूलों को
चूम लेता है और फिर
एक मोती सी मुस्कान
सजा देता है उन की ताजा हरी पत्तियों पर
और दिला जाता है मुझे
किसी अपने की याद
कि वो डूबा हुआ होगा अपने कर्तव्य के निर्वहन में
मेरे सावन के मोल पर

- अमित खरे
१ सितंबर २०२५

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter