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         वर्षा गीत

 
 
बादल बरसों रे प्यासे देश
वहाँ सब रीत गया

ताल तलैया नदियाँ सूखी
रीता हिया का नेह

कुम्हलाए है कमल कुमुदिनी
घास पात और देह

उड़ उड़ टेर लगाए रे पपीहा
होते गए विदेह
बादल हर्षो रे प्यासे देश

खूब बरसो रे पिया के देश
वहाँ सब रीत गये

- कमलेश कुमार दीवान
१ सितंबर २०२५

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