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         मानसून सत्र

 
 
बाढ़ की विभीषिका
पक्ष-विपक्ष का सलाना
सुनहरा उत्सव

संसद में
एक निबंध की भाँति पढ़ा जाएगा
विवरण के थाल में परोसा जाएगा
भयानक घटनाओं
का मंजर

पीड़ित आसुओं की व्यथा बताकर
वसूली जायेगी भारी भरकम रकम
थपथपाए जाएँगे मेजों के कंधे
भरी जाएगी जेबें सफेद पोशाकों में
बिचौलियों के
हाथ दर हाथ
पीड़ित तक पहुंचेगा
सिर्फ आश्वासन

तब तलक
बह जाएगा पानी
पानी का
स्वभाव है बह जाना..!!!

-त्रिलोचना कौर "तनु"
१ सितंबर २०२५

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