अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर


         एक वर्षा गीत

 
 
धरती बुनती
बूँद बूँद बरसात
मेघ का आँजे काजल

पसर गया पुल
नदिया ऊपर
ताल तलैया
परती ऊसर
बदल गये हालात
टूटकर बरसे बादल

मन किशना का
भरे कुलाँचें
राधा तन मन
चिठिया बाँचें
द्वार खड़ी सौगात
भीगते चूनर आँचल

मेड़ सो रही
खेत बिछाये
कीचड़ मल मल
बीज नहाये
अँकुराए जजबात
हुई है माटी संदल

- जयप्रकाश श्रीवास्तव
१ अगस्त २०२५

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter