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         पानी बरसा

 
 
पानी बरसा सूने रस्ते
खेल रहे दो बच्चे

खुली सड़क पर दौड़ रहे हैं
ढेरों खुशियाँ जोड़ रहे हैं
छप्पक छप्पक पानी की वे
फुलझड़ियाँ सी छोड़ रहे हैं
मस्ती में
डूबे हैं रस्ते
खेल रहे दो बच्चे

सुलभ सुरक्षा के बाने है
हाथों में छाते ताने हैं
देखो आती कार है पीछे
लेकिन दोनो, अनजाने हैं
सावधान कर
देंगे रस्ते
खेल रहे दो बच्चे

धुले पेड़ सब हरियाली है
हवा शुद्ध है मतवाली है
तारों में बूँदें अटकी हैं
बाकी सड़कों पर छिटकी हैं
नहा नहाकर
गीले रस्ते
खेल रहे दो बच्चे

मौसम है कौतुक मनमाना
जी भर इसको जी कर जाना
साथ साथ बहती धारा में
कागज की इक नाव बहाना
बचपन याद
कर रहे रस्ते
खेल रहे दो बच्चे

- पूर्णिमा वर्मन
१ अगस्त २०२५

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