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वर्षा महोत्सव

वर्षा मंगल
संकलन

बेढंगा मौसम  

आज अचानक सड़कों पर दंगा-सा है
साथ हमारे मौसम बेढंगा-सा है

तेज़ हवाएँ बहती हैं टक्कर दे कर
तूफ़ानों ने रोका है चक्कर दे कर
दृढ़ निश्चय फिर भी कंचनजंघा-सा है
झरनों का स्वर मंगलमय गंगा-सा है

निकल पड़े हैं दो दीवाने यों मिलकर
सावन में ज्यों इंद्रधनुष हो धरती पर
उड़ता बादल अंबर में झंडा-सा है
पत्तों पर ठहरा पानी ठंडा-सा है

जान हवाओं में भरती हैं आवाज़ें
दौड़ी रही घाटी के ऊपर बरसातें
हरियाली पर नया रंग रंगा-सा है
दूर हवा में एक चित्र टँगा-सा है

भीगी शाम बड़ी दिलवाली लगती है
चमकती बिजली दीवाली-सी लगती है
बारिश का यह रूप नया चंगा-सा है
मीठा-मीठा दिल में कुछ पंगा-सा है

- पूर्णिमा वर्मन
01 सितंबर 2001

  

बरसात के दिन

चली पवन अमृत रस लेके
पूर्व दिशा मे मारे झोंके

क्या धरणी पर टपक रहे हैं
नभ ने दिए है तोहफ़े जो ये

प्यारी कलियाँ महक रही हैं
सजने लगी पेड़ पर बेलें

बन में मोर मगन हो नाचे
घर उपवन में बाजें बाजे

जुगनू रात में करें उजारा
पवन सुहावन लगता प्यारा

मेढक की घुन प्यारी लागे
पशु प्राणी पुलकित हो जागे

-शंभुनाथ

 

बारिश में

कर ले तू इकरार झमाझम बारिश में
कर ले थोड़ा प्यार झमाझम बारिश में

जुगनू तारे चाँद झमाझम बारिश में
भीगें सारी रात झमाझम बारिश में

वीणा की झंकार झमाझम बारिश में
गूँजे सुर औ' ताल झमाझम बारिश में

बारिश में बारिश में यारां बारिश में
कर ले दिलकी बात झमाझम बारिश में

-कमल आशिक
27 अगस्त 2005

 

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