विजयदशमी की कविताओं का संकलन
 

 

समस्याओं के दशानन

१
त्रेता युग में राम ने, किया दशानन अंत
रोज नए रावण यहाँ, फिरते रूप अनंत

२
खूब करें तैयारियाँ, आते हैं जब पर्व
सब को सम खुशियाँ मिले, रीति-नियम पर गर्व

३
मन के अन्दर बस रहे, जो सारे कुविचार
काम क्रोध मद लोभ का, हो तुरंत प्रतिकार

४
पूजित हो घर में सदा, कन्यायें औ नार
वृद्धों को आदर मिले, करें न अत्याचार

५
प्रतिदिन उत्सव सा यहाँ, सुख-संपत्ति संयोग
आतंकों से हीन हो, सकल विश्व के लोग

६
अच्छाई से हार के,  सदा बुरे का अंत
राम और रावण यहीं, करते युद्ध अनंत

– ज्योतिर्मयी पंत


 

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