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कैसी सर्दी

सर्द सुबह

गर्म महल है
गर्म है माथा
घोटालों की
गर्म है गाथा
रिश्तों में भी कड़वाहट की
कुछ गर्मी-सी छाई है
कैसी सर्दी आई है

धर्म टूटकर
धर्म बना है
लाल रक्त से
धर्म सना है
धर्मगुरू नें ढोंग रचाकर
बेशर्मी बिखराई है
कैसी सर्दी आई है

सत्य से लड़कर
सत्य मिटा है
आज खेल में
सत्य पिटा है
नव असत्य की आँगन आँगन
अब बहती पुरवाई है
कैसी सर्दी आई है

सर्द झोंपड़ा
सर्द साँस है
जीवन क्या है
सर्द आस है
सर्द भावनाओं की सूची
ठिठुर ठिठुर कुम्हलाई है
कैसी सर्दी आई है
यह कैसी सर्दी आई है

- अभिनव शुक्ला
१ दिसंबर २०१९

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