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हिम नदी में कूदकर

सर्द सुबह

हिम नदी में
कूदकर मौसम
इन दिनों ज्यों स्नान करता है

हर तरफ है एक कुहरा आवरण
आग ने भी शान्ति-सी कर ली वरण
सूर्य खुद मफलर गले में बाँध
शीत का
ऐलान करता है

हिम नदी में
कूदकर मौसम
इन दिनों ज्यों स्नान करता है

शाम होते ही जगे सोये सपन
ढूँढते हैं शयन शैया में तपन
एक कोने में दुबक दीपक निबल
शीत का
गुणगान करता है

हिम नदी में
कूदकर मौसम
इन दिनों ज्यों स्नान करता है

--गिरिमोहन गुरु
१ दिसंबर २०१९

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