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सर्दियों में बारिश

सर्द सुबह

मल्हारें गाने लगी खिड़की पर बरसात
जलतरंग बजती रही सर्दी वाली रात
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पवन मंद लिखता रहा बूँदों वाले छंद
और हवा कहती रही कविताएँ स्वच्छंद
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बादल मतवाले हुए पीटें ढोल मृदंग
जोर शोर से बढ़ गई जाड़े वाली जंग
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जाते जाते रुक गया सर्दी का कोहराम
जाड़े में कटती नहीं बिन अलाव के शाम
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सर्दी सर्दी मन हुआ सिहरन सिहरन गात
गरम चाय लगने लगी मनभावन सौगात
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- पूर्णिमा वर्मन
१ दिसंबर २०१९

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