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हरसिंगार से रिश्ते

 

पावन हरसिंगार से रिश्ते
टूटे न ये प्यार के रिश्ते

धरती के
आँचल पर जरदोजी रचते
डोली चढ़ पवनों की मंद मंद हँसते
ऋतुओं खिले बहार के रिश्ते

आँगने के
हाथों में सजते हैं ऐसे
मूँगे और मोती के कंगन हो जैसे
सावन मिले फुहार के रिश्ते

पेड़ों के छज्जे
से उचक उचक गिरते
घर की दिवारों में रंग कई भरते
अम्मा की मनुहार के रिश्ते

रचना श्रीवास्तव
१८ जून २०१२

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