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ख़त लिखना- फागुनी बतास जब खुले !
हाँ, लिखना- दूध में गुलाल जब घुले !
लिखना जी : फूले जब हरसिंगार...
शुक्रिया !

बौर लगे आमों का हाल चाल भी लिखना !
मधु मासे बौने मन की उछाल भी लिखना !
लिखना : जब झुक-झूमे नीम-डार...
शुक्रिया !

लिखना : पोखर-तीरे हंस युग्म का होना ।
किरणों सिरहाने रखकर लहरों का सोना ।
लिखना : जब जलकुम्भी हो उधार...
शुक्रिया !

-शलभ श्रीराम सिंह
१८ जून २०१२

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