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        मन में जनकल्याण बसाए   

 
सूरज की
शहजादी गर्मी नौ माह अज्ञात वास कर
वर्षा-शीत बिता कर आई दूर दूर तक फैलाए पर
मन में जन-कल्याण बसाए

सघन साधना
तीन माह की रीते घट बादल के भरती
खाली समय खेत में सो कर श्रेष्ठ फसल हित शक्ति सेती
मन में जन कल्याण बसाए

अच्छे दिन
लाने की चाहत सह लेती लू-लपट प्रमाद
खारा जल सागर से लेकर मीठा करती भेज प्रवास
मन में जन कल्याण बसाए

भरती खेतों
की बिवाइयाँ काले मेघों के मरहम से
हरियाली धन-धान्य बिखेरे सोखा जल बरसा कर नभ से
मन में जन कल्याण बसाए

- लक्ष्मीनारायण गुप्त
१ जून २०२६

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