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        भक्ति के त्योहार में

 
आओ मिलकर रास रचाएँ मैया के दरबार में
थिरकें, झूमें, गीत सुनाएँ
भक्ति के त्योहार में

छन-छन छनके पायल प्यारी चूड़ी खनके हाथ में
ढोल बजे, शहनाई बाजे रंग सजे हर द्वार में
नाचें, गाएँ, मौज मनाएँ
खुशियों के इजहार में

लाल चुनरिया मैया ओढ़े, ज्योति जगे हर द्वार
गरबा की है खनक निराली, गूँजे जय-जयकार
ढोल बजे और थिरकें पग ये
भक्ति की रसधार में

गोल-गोल सब घूम के नाचें, मिलकर बारंबार
मैया सबके कष्ट मिटाएँ, भवसागर से कर दे पार
माँ के चरणों शीश नवाएँ,
श्रद्धा के उद्गार में

- सुरेन्द्र कुमार शर्मा
१ अक्टूबर २०२६

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