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दुलरुआ फाग

ग्यारहों मासों का
इकलौता दुलरुआ फाग

देखते उसको उतरतीं
पूस-माघी त्योरियाँ
चैत्र ले के गोद में
रहता सुनाता लोरियाँ
जेठ और बैसाख
रखते दूर अपनी आग

सानते भूले नहीं
सावन या भादों कीच में
टोकने आते नहीं हैं
क्वार-कातिक बीच में
नेह अगहन का मिले
आषाढ़ रखता लाग

- कुमार गौरव अजीतेन्दु
२ मार्च २०१५

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