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  होली कहती है
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आपस की तकरार मिटाओ होली कहती है
मन से मन के तार मिलाओ होली कहती है

रिश्तों के गलियारे रोशन रहे हमेशा ही
अपनेपन का दीप जलाओ होली कहती है

हो ही जाती है माना के अनबन अपनों से
लेकिन बीती बात भुलाओ होली कहती है

तर्क वितर्कों के जंगल से बाहर भी आकर
कुंठाओं को दूर हटाओ होली कहती है

अंबर भी अब लाल गुलाबी पीला हो जाए
तुम भी ऐसे रंग उड़ाओ होली कहती है

मन में ईर्ष्या द्वेष जलन का रोग नहीं पालो
प्रेम प्यार के भाव जगाओ होली कहती है

रमा हमेशा याद रहे इस होली की मस्ती
रंगों में कुछ यूँ घुल जाओ होली कहती है
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- रमा प्रवीर वर्मा 
१ मार्च २०१९

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