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      कितने रंग निराले
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नीला अंबर काले बादल
हरे भरे वन प्यारे
रंग बिरंगे फूल खिल रहे
उपवन में हैं सारे

कहीं चंपई लाल गुलाबी
भंटइ नीले पीले
कहीं चाँदनी से चमके हैं
हरसिंगार के टीले
रंग सुनहरा लिये रात में
चमका करते तारे

नारंगी सी आभा लेकर
सूरज प्रात निकलता
सतरंगी उपहार बाँटता
सारा दिन है चलता
हो जाती है धरती धानी
बरसे बादल न्यारे

रंग बिरंगी इस दुनिया में
कितने रंग निराले
कहीं खुशी के उजले उजले
कहीं गमों के काले
रंग बदल जाता जीवन का
मन के जीते हारे

- धीरेन्द्र द्विवेदी  
१ मार्च २०२६

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