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      रंग उड़ाती टोलियाँ
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रंगों की गमक पुष्पित महक
फाग पर्व आया उमक उमक

मौसम पर यौवन छाया है
फागुन की अद्भुत माया है
झाँझ मजीरे ढोल बज रहे
होली ने रसिया गाया है
उनको भी कैसी चढ़ी सनक
पी रहे भंग पर भंग गटक

रंग उड़ाती हुई टोलियाँ
मिष्ठानों की लिये झोलियाँ
रंगों की धारों में खिलकर
गूँजे मस्त हँसी ठिठोलियाँ
मृदंग थाप और ढोल धमक
नाचें नर नारी ठुमक ठुमक

धुलेंड़ी के अतुल चटक रंग
उड़ते बासंती पवन संग
प्रकृति करती सुरम्य श्रंगार
होली में थिरके अंग अंग
चैती के स्वरों की सुन भनक
धड़कें हृदय मत्त धमक धमक

वंचित संचित सब मिलें गले
छल कपट त्याग कर संग चलें
पिचकारी के प्रेम नीर से
बहे घृणा द्वेष मैत्री फले
रिश्तों की निखरे चमक दमक
फाग पर्व आया उमक उमक

- ओम प्रकाश नौटियाल 
१ मार्च २०२६

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