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  रंग डालो
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आस पास सारा रंग डालो
आम खास सारा रंग डालो
भंगेली मस्ती है छाई
रंगीली होली है आई

हरे रंग की भारी किल्लत
दिखती है
क्या इधर क्या उधर
सुगना छुपे छुपे तो कैसे
ठूँठ पड़े भूरे पेड़ों पर
रंग तोतई मुट्ठी में ले
झूम झूम कर खूब उड़ाओ
हरे भरे तोते के घर को
हरे रंग में
रंग दो भाई

‘मोरपंखिया आसमान हो
ऐसा क्या बस सोचेंगे ही ?
सोच अगर बस सोच रही तो
रंग डहक कर कोसेंगे ही
मौक़ा है धूसर धूसर से
आसमान संग खेलो होली
पूरे दम से रंग उछालो
कर दो नीलम
नील रंगाई

हवा न जाने है उदास या
रूठी है कुछ पता लगायें
न तो महकती है न बहकती
चलो न चल कर उसे मनायें
ख़ुशबू भरा अबीर उड़ा कर
पोर पोर उसका महका दें
गले लगायें और प्यार से
दें फगवा की
उसे बधाई
.
- सीमा अग्रवाल
१ मार्च २०२६

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