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       तीन कुंडलिया

 

१.
राम नाम
होता है संसार का, राम नाम आधार
राम नाम के जाप से, होता बेड़ा पार
होता बेड़ा पार, भरम सारे मिट जाते
सबको सच्ची राह, रामजी सदा दिखाते
कहे रमा ये बात, भला फिर क्यों तू रोता
जो करते हैं राम, वही इस जग में होता

२.
जैसे को तैसा
जैसे को तैसा मिले, दुनिया का दस्तूर
नीयत से इंसान क्यों, फिर भी है मजबूर
फिर भी है मजबूर, लाश खुद की ही ढोये
पाये कैसे आम, पेड़ काँटों के बोये
करलो तनिक विचार , काम करते हो कैसा
है दुनिया की रीत, मिला जैसे को तैसा

3.
नैतिकता
हर चौराहे हो रहा, नैतिकता का खून
पट्टी काली बाँधकर, बैठा है कानून
बैठा है कानून, तुला हाथों में लेकर
खुले आम हर काम, हो रहा रिश्वत देकर
कहे रमा यह बात, देखलो तुम भी चाहे
भ्रष्टाचारी लोग, मिलेंगे हर चौराहे

- रमा प्रवीर वर्मा
१ फरवरी २०२६

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