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मीरा ठाकुर की मुकरियाँ

 


पलकों पर आकर रुक जाए?
मन की हर धड़कन पढ़ जाए
सुख-दुख का बन जाए राज़—
क्या सखि साजन? नहीं सखि? ख़्वाब


राह कठिन हो? साथ निभाए?
गिरते मन को पुनः उठाए
जीवन भर देता है ताकत
क्या सखि साजन? नहीं सखि? हिम्मत

मन की सारी गाँठें खोले?
मीठे-मीठे बोल ही बोले
हर पल रखे हृदय के पास—
क्या सखि साजन? नहीं विश्वास

अँधियारे में राह दिखाए?
हर संकट में काम भी आए
बिन उसके सब लगे अजान—
क्या सखि साजन? नहीं सखि ज्ञान

कभी रुलाए कभी हँसाए
बीते पल फिर याद दिलाए
जीवन का अनमोल हिसाब—
क्या सखि साजन? नहीं सखि याद

- मीरा ठाकुर
१ अगस्त २०२६

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