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मुरारी स्वामी की मुकरियाँ

 


सपने बड़े-बड़े दिखलाए
बात बनाए और रिझाए
लगे सभी की नैया खेता
ए सखी! साजन, नहिं री! नेता


दुख-सुख सबके हरदम बाटे
बात लगे उसकी फर्राटे
न पुल छोड़े न ही रेता
ए सखी! साजन, नहिं री! नेता


ऊँचा बोले मुझको छेड़े
नित गलियों के काटे गेड़े
देख मुझे सहलाये दाढ़ी
क्या सखि साजन? नहिं सखि कबाड़ी
 

देख मेघ को वो चिल्लाये
हर्षित होकर नाचे गाये
छलिया प्यारा वो चित्तचोर
क्या सखि साजन? नहिं सखि मोर


साथ उसी का हरदम भाता
देख उसी को मन है गाता
शीतलता का वो भान अमर
क्या सखि साजन? नहिं सखि कूलर


प्यारा मेरा राज दुलारा
अखिल विश्व में सबसे न्यारा
देख उसे मन होता चंगा
क्या सखि साजन? न सखि तिरंगा

- मुरारी स्वामी
१ अगस्त २०२६

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