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प्रगति शंकर की
मुकरियाँ |
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१
गुण उसके है बड़े अनमोल
सेहतमंद वह गोल-मटोल
सुघड़ सरस, नहिं तनिक साँवला
क्या सखि साजन? नहीं आँवला
२
डंडे जैसी लंबाई है
बड़ी मधुरता पर पाई है
लगता ज्यों हरियाला बन्ना
क्या सखि साजन? नहिं सखि गन्ना
३
ताल तलैया उसको भाए
काला कोट पहन कर आए
सरल हृदय, नहिं कभी दहाड़े
क्या सखि साजन? नहिं सिंघाड़े
४
उससे नजरें मोड़ न पाती
सम्मोहन मै तोड़ न पाती
उसके बिन हर बात अधूरी
सखि साजन? नहि पानीपूरी
५
गुण है उसके बड़े अनमोल
सदा मधुरता देता घोल
चेहरे पर ले आए नूर
क्या सखी साजन? नही खज़ूर
प्रगति शंकर की मुकरियाँ
६
आफत बन कर सब पर छाए
बच्चे दुबके नजर न आए
सभी बने है उसका मुहरा
का सखि साजन? ना सखि कुहरा
७
सम्मोहन उसका भरमाए
डूबे जो वह उबर न पाए
ज्यों दलदल की गहरी झील
क्या सखि साजन? नहि सखी रील
८
उस के बिन लगती लाचारी
उस से ही मुस्कान हमारी
उज्जवल ज्यों मोती की पाँत
क्या सखि साजन?,नहीं सखि दाँत
- प्रगति शंकर
१ अगस्त २०२६ |
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