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आचार्य विजय तिवारी किसलय
की मुकरियाँ

 


पूरा भारत माता कहता
उसका पेय घरों में रहता
शिशु को रोज पिलाती मैया
ऐ सखि साजन? नहिं सखि गैया

ये हैं कल के भाग्य विधाता
हँसना लड़ना पढ़ना आता
पर ये सभी उमर के कच्चे
ऐ सखि साजन? नहिं सखि बच्चे

सिर पर मुकुट, कमर तलवार
लेकर आये नवेली नार
जिसकी दम पर घर का चूल्हा
ऐ सखि साजन? नहिं सखि दूल्हा

धरती उनकी अपनी माता
जिनका प्रभु से पति का नाता
पूरा जीवन दुख में बीता
ऐ सखि साजन? नहिं सखि सीता

मानव मन की चिन्ता हरता
पहरेदारी घर की करता
हर द्वारे पर रहने वाला
ऐ सखि साजन? नहिं सखि ताला

-आचार्य विजय तिवारी 'किसलय'
१ अगस्त २०२६

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