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मन राधा हुआ
(क्षणिकाएँ)
     

 





 

 


 




 


१
मन
राधा हुआ
मीरा हुआ
बँधा पल में
युगों का फेरा हुआ

२
गोपियों का
चीर चुराया
पांचाली का
चीर बढ़ाया
माखनचोर कन्हैया
तू हर रूप में भाया

३
महारण में
संबंधों के सागर में
दिग्‍भ्रमित हुए धनुर्धर
कौन लक्ष्‍य, संधानें शर
विराट रूप से संशय मिटाया
पार्थ को धर्म-पथ दिखाया

-सुशीला श्योराण ’शील’
२६ अगस्त २०१३

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