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नया यह साल
 
सबको यह अभिवादन करता
सब के मन में खुशियाँ भारता
आया नया-नया यह साल
पूछ रहा है सबके हाल

किसकी कितनी यहाँ कमाई,
किसकी खेती सूखि पराई
कौन यहाँ हैं चतुरे दादा
जो बन बैठे मालामाल

हैम तो भइया हैं भिखमंगू
है सिंघासन फिर भी गंगू
तौल रहे हैं अपनी बानी
अपनी करनी अपनी ढाल

और करो कुछ फुर्सत में तुम
हाथ धरे क्यों बैठे गुम
मफ़लर टोपी वाले भइया
तुम भी ठोंको खुलकर ताल।

- कर्ण बहादुर
२९ दिसंबर २०१४

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