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नव वर्ष का प्रथम उत्सव
 
लो आ गया
नव वर्ष का प्रथम उत्सव
मकर संक्राति, लोहड़ी, माघी
ले ली सूर्य ने उत्तरायण दशा
खुल गए मन के, घर के बंद द्वार
फैल गई नर्म, गुदगुदी, प्रतीक्षित धूप
लान-दालान में
टहनियों को ढकने लगे
नव पल्लव- नव अंकुर

यह वही दिन है
जब महिषासुर-वधिनी दुर्गा ने
अवतार लिया था
जब विष्णु मधुसूदन हो गए थे
भीष्म पितामह की मोक्षाकांक्षा फलित हुई थी

झोली भर-भर ऊर्जा लाता है यह त्योहार
बंटते हैं अपनों में
नेह-सने मिष्ठान-उपहार
कि
रिश्तों कि गर्मी बनी रहे, घनी रहे।

- मधु संधु
१५ जनवरी २०१७

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