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करवटें लेने लगा मौसम
 
करवटें लेने लगा मौसम
आ गये हैं लौट कर
फिर दिन उमंगों के।

भोर का पंछी लगा गाने
पर लगी फिर धूप फैलाने
शान्त ठहरे झील के जल में
जाल किरणों के लगे भाने

सरगमों पर इन हवाओं के
थिरक उठते पॉव
रह-रह कर तरंगों के।

ओस भीगी बालियाँ लहकीं
फूल के संग डालियाँ महकीं
स्वप्न फिर मधुमास का लेकर
फिर रहीं पुरवाइयाँ बहकी

द्वार फिर खोले दिशाओं ने
टाँग कर पर्दे क्षितिज पर
विविध रंगों के।

फिर तटों पर जुड़ गये मेले
उत्सवी ये दृश्य अलबेले
बाँट कर तिल-गुड़ चलो हम सब
शीत के ये दिन कठिन झेलें

पंख लेकर फिर उमीदों के
उड़ चला मन संग इन
ऊँची पतंगों के

- मधु शुक्ला
१५ जनवरी २०१७

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