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हुई मकर-संक्रांति
 
मीठे गन्ने में प्रिय तेरे
प्यार का है अहसास

मक्के की चिटकन उम्दा है
खिचड़ी का भी स्वाद
काले तिल को भाया देखो
गोरे गुड़ का साथ

ओढ़े खड़ा दुशाला मौसम
लो ठिठुरन के पास।

पीली लाल पतंग गगन में
फँसी हुई किस हाथ
डोरी तेरे हाथों में प्रिय
रखना मुझको पास

पूर्ण हुई विश्रान्ति खिल उठा
जगमग सूर्य-प्रकाश

हुई मकर-संक्रांति सूर्य की
झिलमिल दिखी उजास
मीठी-मीठी धूप पौष की
कट जाएगा मास।

नन्हे-मुन्ने दिन बढ्ने का
हुआ सुखद आभास

- त्रिलोचना
१५ जनवरी २०१७

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